हिंदी गाइड · Domestic Violence

घरेलू हिंसा का केस कैसे करें? (Gharelu Hinsa Act 2005)

घरेलू हिंसा केवल मारपीट नहीं है; घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 में शारीरिक, मानसिक, यौन, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक हिंसा शामिल हैं। यह जानकारी सामान्य है। यदि आप तुरंत खतरे में हैं, तो 112 या 181 (महिला हेल्पलाइन) पर संपर्क करें।

Updated

घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 और पारिवारिक कानून की किताबें

कौन आवेदन कर सकता है

अधिनियम उन महिलाओं को संरक्षण देता है जो किसी पुरुष के साथ घरेलू संबंध (विवाह, विवाह की प्रकृति का संबंध या साझा घर) में हैं या रही हैं। उसके अंतर्गत पति के अलावा ससुराल के संबंधियों के विरुद्ध भी आवेदन हो सकता है।

अदालत से कौन-सी राहत मिल सकती है

  • संरक्षण आदेश — हिंसा रोकने का आदेश।
  • निवास आदेश — साझा घर में रहने का अधिकार।
  • मौद्रिक राहत — भरण-पोषण और हुए खर्च की भरपाई।
  • कस्टडी आदेश — बच्चे की अस्थायी कस्टडी।
  • मुआवज़ा आदेश — चोट और मानसिक पीड़ा के लिए।

शिकायत कैसे और कहाँ करें

आवेदन सीधे मजिस्ट्रेट के सामने, या संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता संस्था के माध्यम से किया जा सकता है। कुछ मामलों में पुलिस में अलग से FIR भी संभव है, जैसे भारतीय न्याय संहिता में क्रूरता संबंधी प्रावधान और दहेज उत्पीड़न। कौन-सा रास्ता उचित है, यह तथ्यों पर निर्भर है।

कौन-से सबूत रखें

  • चोट की मेडिकल रिपोर्ट और फ़ोटो
  • संदेश, कॉल रिकॉर्ड और ईमेल, तारीख़ सहित
  • गवाहों के नाम और पते
  • पहले की शिकायतों की प्रतियाँ
  • आय और खर्च से जुड़े दस्तावेज़

आगे पढ़ें

घरेलू हिंसा और दहेज पेज पर और विवरण है। संबंधित: गुजारा भत्ता, तलाक की प्रक्रिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या घरेलू हिंसा के लिए अलग से वकील ज़रूरी है?

कानूनन आवेदन संरक्षण अधिकारी के माध्यम से भी हो सकता है, पर कार्यवाही और राहत तय कराने में वकील की सलाह उपयोगी रहती है।

क्या घर छोड़ना पड़ता है?

नहीं। महिला को साझा घर में रहने का अधिकार है और अदालत निवास आदेश दे सकती है।

क्या यह अधिनियम पुरुषों पर भी लागू होता है?

यह अधिनियम महिलाओं के संरक्षण के लिए है। पुरुष अन्य सामान्य कानूनों का सहारा ले सकते हैं।

Domestic violence case kaise kare?

Magistrate ke saamne ya Protection Officer ke zariye application di jaati hai. Saboot, medical report aur messages sambhal kar rakhein.

Gharelu hinsa mein kya relief milti hai?

Protection order, residence order, monetary relief, custody aur compensation. Kaun si relief milegi, ye court ke vivek par hai.

Need Legal Assistance for a Matrimonial or Family Matter in Lucknow?

Speak to Advocate Nidhi Singh at Chamber No. 62, Family Court, Kaiserbagh, Lucknow. Share a short outline of your matter by phone or WhatsApp to arrange a confidential consultation.

General Legal Information

Information on this page is for general educational purposes and does not constitute legal advice. Each matter depends on its own facts, documents and applicable law. No outcome or timeline is guaranteed.