हिंदी गाइड · Child Custody

बच्चे की कस्टडी किसको मिलती है? (Bache ki Custody Kisko Milti Hai)

तलाक या अलगाव के समय सबसे भावनात्मक सवाल बच्चे की कस्टडी का होता है। भारतीय अदालतें किसी एक माता-पिता को स्वतः अधिकार नहीं देतीं; निर्णय का केंद्र बच्चे का हित और कल्याण होता है। यह सामान्य जानकारी है, किसी विशिष्ट मामले की कानूनी सलाह नहीं।

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बच्चे की कस्टडी और मुलाकात के अधिकार से जुड़ा पारिवारिक कानून

अदालत क्या देखती है

संरक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 के अनुसार संरक्षक नियुक्त करते समय बच्चे का कल्याण सर्वोपरि होता है। सुप्रीम कोर्ट ने गौरव नागपाल बनाम सुमेधा नागपाल (2009) में भी यही कहा। अदालत सामान्यतः बच्चे की उम्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, भावनात्मक लगाव, माता-पिता की देखभाल की क्षमता और बच्चे की समझदार इच्छा पर विचार करती है।

क्या पाँच साल तक के बच्चे की कस्टडी माँ को मिलती है?

हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम, 1956 की धारा 6 के अनुसार पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चे की कस्टडी सामान्यतः माँ के पास रहती है। यह एक सामान्य नियम है, पूर्ण अधिकार नहीं; बच्चे का हित हर स्थिति में निर्णायक रहता है।

कस्टडी के प्रकार और मुलाकात का अधिकार

  • भौतिक कस्टडी — बच्चा किसके साथ रहेगा।
  • संयुक्त कस्टडी / साझा पालन-पोषण — कुछ मामलों में अदालतें दोनों की भागीदारी तय करती हैं।
  • मुलाकात (visitation) — जिस माता-पिता के पास कस्टडी नहीं है, उसे आम तौर पर तय समय पर मिलने का अधिकार दिया जा सकता है।
  • संरक्षकता — बच्चे के कानूनी निर्णयों और संपत्ति की देखरेख का अधिकार।

लखनऊ में प्रक्रिया

कस्टडी या संरक्षकता का आवेदन सामान्यतः परिवार न्यायालय में दिया जाता है। तलाक की कार्यवाही के दौरान भी अंतरिम कस्टडी या मुलाकात की माँग की जा सकती है। अंग्रेज़ी में विस्तार के लिए child custody guide और child custody and visitation पेज देखें। संबंधित जानकारी: तलाक की प्रक्रिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या बच्चे की कस्टडी हमेशा माँ को मिलती है?

नहीं। पाँच वर्ष से छोटे बच्चे में माँ को सामान्यतः प्राथमिकता है, पर अंतिम निर्णय बच्चे के हित पर निर्भर करता है।

क्या बच्चा अपनी पसंद बता सकता है?

समझदार उम्र का बच्चा हो तो अदालत उसकी इच्छा पर विचार कर सकती है, पर यह अकेला निर्णायक कारण नहीं होता।

जिसके पास कस्टडी नहीं है, क्या वह बच्चे से मिल सकता है?

अदालत सामान्यतः मुलाकात का अधिकार तय करती है, जब तक यह बच्चे के हित के विरुद्ध न हो।

Bache ki custody kisko milti hai?

Custody court bache ke hit ko dekh kar tay karti hai. Maa ya pita, kisi ko bhi automatic haq nahi milta.

Custody case kahan file hota hai?

Aam taur par Family Court mein. Lucknow mein ye Family Court Kaiserbagh mein hota hai; jurisdiction case ke hisaab se tay hoti hai.

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